Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.103.2: यहाँ शेषनाग विराजमान हैं, जो अपनी विख्यात तपशक्ति से सम्पूर्ण पृथ्वी को सदैव अपने मस्तक पर धारण करते हैं ॥2॥   |   mahabharat अध्याय 5.103: नागलोकके नागोंका वर्णन और मातलिका नागकुमार सुमुखके साथ अपनी कन्याको ब्याहनेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 103: नागलोकके नागोंका वर्णन और मातलिका नागकुमार सुमुखके साथ अपनी कन्याको ब्याहनेका निश्चय  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.103.2 
एष शेष: स्थितो नागो येनेयं धार्यते सदा।
तपसा लोकमुख्येन प्रभावसहिता मही॥ २॥
 
 
अनुवाद
यहाँ शेषनाग विराजमान हैं, जो अपनी विख्यात तपशक्ति से सम्पूर्ण पृथ्वी को सदैव अपने मस्तक पर धारण करते हैं ॥2॥
 
Here is situated Sheshnag, who, with his renowned austerity powers, always holds the entire earth on his head. ॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)