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mahabharat 5.102.9: मटाले! वरुणदेव की पश्चिम दिशा अत्यंत प्रभावशाली विश्वरूपा सुभद्रा नामक सुरभिकन्या के पास है। 9॥   |   mahabharat अध्याय 5.102: सुरभि और उसकी संतानोंके साथ रसातलके सुखका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 102: सुरभि और उसकी संतानोंके साथ रसातलके सुखका वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.102.9 
पश्चिमा वारुणी दिक् च धार्यते वै सुभद्रया।
महानुभावया नित्यं मातले विश्वरूपया॥ ९॥
 
 
अनुवाद
मटाले! वरुणदेव की पश्चिम दिशा अत्यंत प्रभावशाली विश्वरूपा सुभद्रा नामक सुरभिकन्या के पास है। 9॥
 
Matale! Varundev's western direction is held by Surbhikanya named Subhadra, a very influential Vishwarupa. 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)