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mahabharat 5.102.7: हे माता! चार गौएँ और हैं जो सुरभि की पुत्रियाँ हैं और सम्पूर्ण दिशाओं में निवास करती हैं। वे ही दिशाओं का पालन और पोषण करती हैं॥7॥   |   mahabharat अध्याय 5.102: सुरभि और उसकी संतानोंके साथ रसातलके सुखका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 102: सुरभि और उसकी संतानोंके साथ रसातलके सुखका वर्णन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.102.7 
अस्याश्चतस्रो धेन्वोऽन्या दिक्षु सर्वासु मातले।
निवसन्ति दिशां पाल्यो धारयन्त्यो दिश: स्म ता:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
हे माता! चार गौएँ और हैं जो सुरभि की पुत्रियाँ हैं और सम्पूर्ण दिशाओं में निवास करती हैं। वे ही दिशाओं का पालन और पोषण करती हैं॥7॥
 
O mother! There are four other cows who are the daughters of Surabhi and reside in all the directions. They are the ones who sustain and nourish the directions. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)