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mahabharat 5.102.2: पृथ्वी के सार से प्रकट हुई, छह रसों के सार से संयुक्त, तथा सर्वोत्तम, अवर्णनीय नीरस दूध से युक्त यह सुन्दरी स्त्री सदैव अपने स्तनों से प्रवाहित होती रहती है।   |   mahabharat अध्याय 5.102: सुरभि और उसकी संतानोंके साथ रसातलके सुखका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.102.2 
क्षरन्ती सततं क्षीरं पृथिवीसारसम्भवम्।
षण्णां रसानां सारेण रसमेकमनुत्तमम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वी के सार से प्रकट हुई, छह रसों के सार से संयुक्त, तथा सर्वोत्तम, अवर्णनीय नीरस दूध से युक्त यह सुन्दरी स्त्री सदैव अपने स्तनों से प्रवाहित होती रहती है।
 
This beautiful lady, manifested from the essence of the earth, combined with the essence of the six Rasas and the best, indescribable monotonous milk, always flows from her breasts.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)