Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.102.15: वह कथा इस प्रकार है – ‘नागलोक, स्वर्गलोक और स्वर्गलोक विमान में रहना उतना सुखदायक नहीं है, जितना रसातल में रहना है।’ 15॥ | mahabharat अध्याय 5.102: सुरभि और उसकी संतानोंके साथ रसातलके सुखका वर्णन । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न नागलोके न स्वर्गे न विमाने त्रिविष्टपे।
परिवास: सुखस्तादृग् रसातलतले यथा॥ १५॥
अनुवाद
वह कथा इस प्रकार है – ‘नागलोक, स्वर्गलोक और स्वर्गलोक विमान में रहना उतना सुखदायक नहीं है, जितना रसातल में रहना है।’ 15॥
That story is as follows – ‘Living in Nagalok, Swargalok and Swargalok plane is not as pleasurable as living in the abyss is.’ 15॥
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि मातलिवरान्वेषणे द्वॺधिकशततमोऽध्याय:॥ १०२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें मातलिके द्वारा वरका खोजविषयक एक सौ दोवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १०२॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥