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सुधाहारेषु च सुधां स्वधाभोजिषु च स्वधाम्।
अमृतं चामृताशेषु सुरभी क्षरते पय:॥ १३॥
अनुवाद
सुरभि के स्तनों से जो दूध निकलता है, वह अन्न खाने वाले मनुष्यों के लिए सुधा है, अन्न खाने वाले पितरों के लिए स्वधा है और अमृत खाने वाले देवताओं के लिए अमृत है।
The milk that Surabhi exudes from her breasts is Sudha for the people who eat food, Swadha for the ancestors who eat food and nectar for the gods who eat nectar.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥