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mahabharat 5.101.8: भगवान विष्णु ही उनके आराध्य हैं। वे ही उनके परम आश्रय हैं। भगवान विष्णु सदैव उनके हृदय में निवास करते हैं और विष्णु ही उनकी प्रेरणा के एकमात्र स्रोत हैं ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 5.101: गरुड़लोक तथा गरुड़की संतानोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 101: गरुड़लोक तथा गरुड़की संतानोंका वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.101.8 
दैवतं विष्णुरेतेषां विष्णुरेव परायणम्।
हृदि चैषां सदा विष्णुर्विष्णुरेव सदा गति:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
भगवान विष्णु ही उनके आराध्य हैं। वे ही उनके परम आश्रय हैं। भगवान विष्णु सदैव उनके हृदय में निवास करते हैं और विष्णु ही उनकी प्रेरणा के एकमात्र स्रोत हैं ॥8॥
 
Lord Vishnu is their deity. He is their ultimate refuge. Lord Vishnu always resides in their heart and Vishnu is their only source of inspiration. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)