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कर्मणा क्षत्रियाश्चैते निर्घृणा भोगिभोजिन:।
ज्ञातिसंक्षयकर्तृत्वाद् ब्राह्मण्यं न लभन्ति वै॥ ६॥
अनुवाद
ब्राह्मण कुल में जन्म लेने पर भी वे कर्मों से क्षत्रिय हैं। उनमें दया नहीं है। वे साँप खाते हैं। अपने ही भाई-बंधुओं (साँपों) को मारने के कारण उन्हें ब्राह्मण का दर्जा नहीं मिलता।
Though born in a Brahmin family, they are Kshatriyas by their deeds. They have no mercy. They eat snakes. Because of killing their own brothers and relatives (snakes), they do not get the status of a Brahmin.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥