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mahabharat 5.101.2-4: हे देवताओं के सारथि! यहाँ विनतानंदन गरुड़ के छह पुत्रों ने अपने वंश का विस्तार किया है, जिनके नाम इस प्रकार हैं- सुमुख, सुनामा, सुनेत्र, सुवर्चा, सुरुच और पक्षीराज सुबल। इन छह पक्षियों ने, जिन्होंने विनता के वंश को बढ़ाया, कश्यप कुल में उत्पन्न हुए और धन का विस्तार किया, गरुड़ कुल की सैकड़ों और हजारों शाखाओं का विस्तार किया है॥2-4॥   |   mahabharat अध्याय 5.101: गरुड़लोक तथा गरुड़की संतानोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 101: गरुड़लोक तथा गरुड़की संतानोंका वर्णन  »  श्लोक 2-4
 
 
श्लोक  5.101.2-4 
वैनतेयसुतै: सूत षड्‍‍भिस्ततमिदं कुलम्।
सुमुखेन सुनाम्ना च सुनेत्रेण सुवर्चसा॥ २॥
सुरुचा पक्षिराजेन सुबलेन च मातले।
वर्धितानि प्रसृत्या वै विनताकुलकर्तृभि:॥ ३॥
पक्षिराजाभिजात्यानां सहस्राणि शतानि च।
कश्यपस्य ततो वंशे जातैर्भूतिविवर्धनै:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे देवताओं के सारथि! यहाँ विनतानंदन गरुड़ के छह पुत्रों ने अपने वंश का विस्तार किया है, जिनके नाम इस प्रकार हैं- सुमुख, सुनामा, सुनेत्र, सुवर्चा, सुरुच और पक्षीराज सुबल। इन छह पक्षियों ने, जिन्होंने विनता के वंश को बढ़ाया, कश्यप कुल में उत्पन्न हुए और धन का विस्तार किया, गरुड़ कुल की सैकड़ों और हजारों शाखाओं का विस्तार किया है॥2-4॥
 
O charioteer of gods! Here the six sons of Vinatanandan Garuda have expanded their lineage, whose names are as follows- Sumukh, Sunama, Sunetra, Suvarcha, Suruch and bird king Subal. These six birds, who increased the lineage of Vinata, were born in the Kashyap clan and expanded the wealth, have expanded hundreds and thousands of branches of the Garuda clan.॥2-4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)