श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 100: हिरण्यपुरका दिग्दर्शन और वर्णन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.100.2 
अनल्पेन प्रयत्नेन निर्मितं विश्वकर्मणा।
मयेन मनसा सृष्टं पातालतलमाश्रितम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
असुरों के मय विश्वकर्मा ने महान् पुरुषार्थ करके अपने मन के संकल्प के अनुसार पाताल के भीतर इस नगर का निर्माण किया है। 2॥
 
Vishwakarma Mayan of the Asuras has made great efforts and built this city inside the underworld as per his mental resolution. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)