श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 100: हिरण्यपुरका दिग्दर्शन और वर्णन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.100.18 
नित्यानुषक्तवैरा हि भ्रातरो देवदानवा:।
परपक्षेण सम्बन्धं रोचयिष्याम्यहं कथम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि देवता और दानव भाई-भाई हैं, फिर भी उनमें सदैव शत्रुता रहती है। ऐसी स्थिति में मैं अपनी पुत्री का विवाह शत्रु के साथ कैसे कर सकता हूँ?॥18॥
 
Although the gods and demons are brothers, there is always enmity between them. In such a situation how can I wish for my daughter's marriage to the enemy?॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)