Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.100.17: तब मातलि ने इस प्रकार कहने वाले नारदजी से कहा, 'हे देवमुनि! मुझे ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए, जो देवताओं को अप्रिय हो।   |   mahabharat अध्याय 5.100: हिरण्यपुरका दिग्दर्शन और वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 100: हिरण्यपुरका दिग्दर्शन और वर्णन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.100.17 
मातलिस्त्वब्रवीदेनं भाषमाणं तथाविधम्।
देवर्षे नैव मे कार्यं विप्रियं त्रिदिवौकसाम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
तब मातलि ने इस प्रकार कहने वाले नारदजी से कहा, 'हे देवमुनि! मुझे ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए, जो देवताओं को अप्रिय हो।
 
Then Matali said to Narada, who was speaking in this manner, 'O sage of gods! I should not do any such work, which is displeasing to the gods.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)