Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.10.49-50: अराजकता के कारण सम्पूर्ण लोक में महान् उत्पात होने लगे। स्वर्ग में देवराज इन्द्र के न रहने से देवता और ऋषिगण भी भयभीत होकर सोचने लगे - ‘अब हमारा राजा कौन होगा?’ किसी भी देवता ने स्वर्ग का राजा बनने का विचार नहीं किया ॥49-50॥ | mahabharat अध्याय 5.10: इन्द्रसहित देवताओंका भगवान् विष्णुकी शरणमें जाना और इन्द्रका उनके आज्ञानुसार वृत्रासुरसे संधि करके अवसर पाकर उसे मारना एवं ब्रह्महत्याके भयसे जलमें छिपना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अराजकं जगत् सर्वमभिभूतमुपद्रव:।
ततो भीताऽभवन् देवा: को नो राजा भवेदिति॥ ४९॥
दिवि देवर्षयश्चापि देवराजविनाकृता:।
न स्म कश्चन देवानां राज्ये वै कुरुते मतिम्॥ ५०॥
अनुवाद
अराजकता के कारण सम्पूर्ण लोक में महान् उत्पात होने लगे। स्वर्ग में देवराज इन्द्र के न रहने से देवता और ऋषिगण भी भयभीत होकर सोचने लगे - ‘अब हमारा राजा कौन होगा?’ किसी भी देवता ने स्वर्ग का राजा बनने का विचार नहीं किया ॥49-50॥
Due to anarchy, great disturbances started taking place in the entire world. Due to the absence of Devraj Indra in heaven, the gods and sages also became afraid and started thinking - 'Who will be our king now?' None of the gods thought of becoming the king of heaven. ॥ 49-50॥
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि सेनोद्योगपर्वणि वृत्रवधे इन्द्रविजयो नाम दशमोऽध्याय:॥ १०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत सेनोद्योगपर्वमें वृत्रवधके प्रसंगमें इन्द्रविजयविषयक दसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १०॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥