श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 10: इन्द्रसहित देवताओंका भगवान‍् विष्णुकी शरणमें जाना और इन्द्रका उनके आज्ञानुसार वृत्रासुरसे संधि करके अवसर पाकर उसे मारना एवं ब्रह्महत्याके भयसे जलमें छिपना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  5.10.41 
ततो देवा: सगन्धर्वा यक्षरक्षोमहोरगा:।
ऋषयश्च महेन्द्रं तमस्तुवन् विविधै: स्तवै:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् देवता, गन्धर्व, यक्ष, राक्षस, महानाग और ऋषिगण नाना प्रकार के स्तोत्रों द्वारा महेन्द्र की स्तुति करने लगे॥41॥
 
Thereafter the Gods, Gandharvas, Yakshas, ​​Rakshasas, Mahanaag and sages started praising Mahendra with various hymns. 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)