vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 5: उद्योग पर्व
»
अध्याय 10: इन्द्रसहित देवताओंका भगवान् विष्णुकी शरणमें जाना और इन्द्रका उनके आज्ञानुसार वृत्रासुरसे संधि करके अवसर पाकर उसे मारना एवं ब्रह्महत्याके भयसे जलमें छिपना
»
श्लोक 41
श्लोक
5.10.41
ततो देवा: सगन्धर्वा यक्षरक्षोमहोरगा:।
ऋषयश्च महेन्द्रं तमस्तुवन् विविधै: स्तवै:॥ ४१॥
अनुवाद
तत्पश्चात् देवता, गन्धर्व, यक्ष, राक्षस, महानाग और ऋषिगण नाना प्रकार के स्तोत्रों द्वारा महेन्द्र की स्तुति करने लगे॥41॥
Thereafter the Gods, Gandharvas, Yakshas, Rakshasas, Mahanaag and sages started praising Mahendra with various hymns. 41॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×