Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.10.38: इसे देखकर इन्द्र ने मन ही मन सोचा, 'यह न तो सूखा है, न गीला, न अस्त्र है, न शस्त्र, अतः मैं इसे वृत्रासुर पर छोड़ दूँगा, जिससे वह क्षण भर में नष्ट हो जाएगा।' 38. | mahabharat अध्याय 5.10: इन्द्रसहित देवताओंका भगवान् विष्णुकी शरणमें जाना और इन्द्रका उनके आज्ञानुसार वृत्रासुरसे संधि करके अवसर पाकर उसे मारना एवं ब्रह्महत्याके भयसे जलमें छिपना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नायं शुष्को न चार्द्रोऽयं न च शस्त्रमिदं तथा।
एनं क्षेप्स्यामि वृत्रस्य क्षणादेव नशिष्यति॥ ३८॥
अनुवाद
इसे देखकर इन्द्र ने मन ही मन सोचा, 'यह न तो सूखा है, न गीला, न अस्त्र है, न शस्त्र, अतः मैं इसे वृत्रासुर पर छोड़ दूँगा, जिससे वह क्षण भर में नष्ट हो जाएगा।' 38.
Seeing it, Indra thought to himself, 'This is neither dry nor wet, neither a weapon nor a weapon, so I will release this on Vritraasura, whereby he will be destroyed in a moment.' 38.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥