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mahabharat 5.10.37: इस प्रकार विचार करते हुए इन्द्र ने भगवान विष्णु का बार-बार स्मरण किया। उसी समय उनकी दृष्टि समुद्र से उठते हुए पर्वत के समान झाग पर पड़ी।   |   mahabharat अध्याय 5.10: इन्द्रसहित देवताओंका भगवान‍् विष्णुकी शरणमें जाना और इन्द्रका उनके आज्ञानुसार वृत्रासुरसे संधि करके अवसर पाकर उसे मारना एवं ब्रह्महत्याके भयसे जलमें छिपना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 10: इन्द्रसहित देवताओंका भगवान‍् विष्णुकी शरणमें जाना और इन्द्रका उनके आज्ञानुसार वृत्रासुरसे संधि करके अवसर पाकर उसे मारना एवं ब्रह्महत्याके भयसे जलमें छिपना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  5.10.37 
एवं संचिन्तयन्नेव शक्रो विष्णुमनुस्मरन्।
अथ फेनं तदापश्यत् समुद्रे पर्वतोपमम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार विचार करते हुए इन्द्र ने भगवान विष्णु का बार-बार स्मरण किया। उसी समय उनकी दृष्टि समुद्र से उठते हुए पर्वत के समान झाग पर पड़ी।
 
Thinking in this manner, Indra repeatedly remembered Lord Vishnu. At this very time his eyes fell on the mountain-like foam rising from the ocean. 37.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)