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mahabharat 5.10.31: हे भरतश्रेष्ठ! तब ऋषियों ने उससे कहा, 'बहुत अच्छा।' इस संधि के बाद वृत्रासुर बहुत प्रसन्न हुआ। 31।   |   mahabharat अध्याय 5.10: इन्द्रसहित देवताओंका भगवान‍् विष्णुकी शरणमें जाना और इन्द्रका उनके आज्ञानुसार वृत्रासुरसे संधि करके अवसर पाकर उसे मारना एवं ब्रह्महत्याके भयसे जलमें छिपना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 10: इन्द्रसहित देवताओंका भगवान‍् विष्णुकी शरणमें जाना और इन्द्रका उनके आज्ञानुसार वृत्रासुरसे संधि करके अवसर पाकर उसे मारना एवं ब्रह्महत्याके भयसे जलमें छिपना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  5.10.31 
बाढमित्येव ऋषयस्तमूचुर्भरतर्षभ।
एवंवृत्ते तु संधाने वृत्र: प्रमुदितोऽभवत्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! तब ऋषियों ने उससे कहा, 'बहुत अच्छा।' इस संधि के बाद वृत्रासुर बहुत प्रसन्न हुआ। 31।
 
O best of the Bharatas! Then the sages said to him, 'Very good'. After this treaty was made, Vritraasura was very happy. 31.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)