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mahabharat 5.10.3: वह तेजस्वी और विशाल आकार का है। युद्ध में उसके बल और पराक्रम की कोई सीमा नहीं है। यदि वह चाहे तो देवताओं, दानवों और मनुष्यों सहित सम्पूर्ण त्रिलोकी को निगल सकता है॥3॥   |   mahabharat अध्याय 5.10: इन्द्रसहित देवताओंका भगवान‍् विष्णुकी शरणमें जाना और इन्द्रका उनके आज्ञानुसार वृत्रासुरसे संधि करके अवसर पाकर उसे मारना एवं ब्रह्महत्याके भयसे जलमें छिपना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 10: इन्द्रसहित देवताओंका भगवान‍् विष्णुकी शरणमें जाना और इन्द्रका उनके आज्ञानुसार वृत्रासुरसे संधि करके अवसर पाकर उसे मारना एवं ब्रह्महत्याके भयसे जलमें छिपना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.10.3 
तेजस्वी च महात्मा च युद्धे चामितविक्रम:।
ग्रसेत् त्रिभुवनं सर्वं सदेवासुरमानुषम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वह तेजस्वी और विशाल आकार का है। युद्ध में उसके बल और पराक्रम की कोई सीमा नहीं है। यदि वह चाहे तो देवताओं, दानवों और मनुष्यों सहित सम्पूर्ण त्रिलोकी को निगल सकता है॥3॥
 
He is radiant and huge in size. There is no limit to his strength and valour in battle. If he wishes, he can devour the entire Triloki (world) including the gods, demons and humans.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)