Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.10.29-30: हे ब्राह्मणों! मैं देवताओं सहित इन्द्र के द्वारा न मारा जाऊँ, न सूखी वस्तु से, न गीली वस्तु से, न पत्थर से, न लकड़ी से, न शस्त्र से, न अस्त्र से, न दिन में, न रात में। यदि मैं इस शर्त पर देवेन्द्र के साथ सदा के लिए संधि कर लूँ, तो मुझे वह अधिक प्रिय है।॥29-30॥ | mahabharat अध्याय 5.10: इन्द्रसहित देवताओंका भगवान् विष्णुकी शरणमें जाना और इन्द्रका उनके आज्ञानुसार वृत्रासुरसे संधि करके अवसर पाकर उसे मारना एवं ब्रह्महत्याके भयसे जलमें छिपना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न शुष्केण न चार्द्रेण नाश्मना न च दारुणा।
न शस्त्रेण न चास्त्रेण न दिवा न तथा निशि॥ २९॥
वध्यो भवेयं विप्रेन्द्रा: शक्रस्य सह दैवतै:।
एवं मे रोचते सन्धि: शक्रेण सह नित्यदा॥ ३०॥
अनुवाद
हे ब्राह्मणों! मैं देवताओं सहित इन्द्र के द्वारा न मारा जाऊँ, न सूखी वस्तु से, न गीली वस्तु से, न पत्थर से, न लकड़ी से, न शस्त्र से, न अस्त्र से, न दिन में, न रात में। यदि मैं इस शर्त पर देवेन्द्र के साथ सदा के लिए संधि कर लूँ, तो मुझे वह अधिक प्रिय है।॥29-30॥
‘O Brahmins! I should not be killed by Indra along with the Gods, neither by a dry object, nor by a wet object, neither by a stone, nor by a wood, neither by a weapon, nor by an unarmed weapon, neither during the day nor at night. If I make a treaty with Devendra forever on this condition, then I prefer it.'॥ 29-30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥