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mahabharat 5.10.25: इन्द्र पुण्यात्माओं द्वारा आदर योग्य हैं। वे महापुरुषों के आश्रय हैं। वे सत्यवादी, निष्कलंक, धर्म के ज्ञाता और सूक्ष्म बुद्धि वाले हैं ॥25॥   |   mahabharat अध्याय 5.10: इन्द्रसहित देवताओंका भगवान‍् विष्णुकी शरणमें जाना और इन्द्रका उनके आज्ञानुसार वृत्रासुरसे संधि करके अवसर पाकर उसे मारना एवं ब्रह्महत्याके भयसे जलमें छिपना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 10: इन्द्रसहित देवताओंका भगवान‍् विष्णुकी शरणमें जाना और इन्द्रका उनके आज्ञानुसार वृत्रासुरसे संधि करके अवसर पाकर उसे मारना एवं ब्रह्महत्याके भयसे जलमें छिपना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  5.10.25 
इन्द्र: सतां सम्मतश्च निवासश्च महात्मनाम्।
सत्यवादी ह्यनिन्द्यश्च धर्मवित् सूक्ष्मनिश्चय:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र पुण्यात्माओं द्वारा आदर योग्य हैं। वे महापुरुषों के आश्रय हैं। वे सत्यवादी, निष्कलंक, धर्म के ज्ञाता और सूक्ष्म बुद्धि वाले हैं ॥25॥
 
Indra is respected by the virtuous. He is the refuge of the great men. He is truthful, blameless, knowledgeable about Dharma and has a subtle intellect. ॥25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)