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mahabharat 5.10.20-22: इससे तुम्हें सुख मिलेगा और इन्द्र के सनातन लोकों पर भी तुम्हारा अधिकार होगा। ऋषियों के ये वचन सुनकर महाबली वृत्रासुर ने सिर झुकाकर सबको प्रणाम किया और इस प्रकार कहा—‘हे श्रेष्ठ देवताओं! हे श्रेष्ठ ऋषियों और गन्धर्वों! आप सब जो कुछ कह रहे हैं, वह मैंने सुन लिया है। हे निष्पाप देवताओं! अब आप सब मेरी भी बात सुनिए। मेरे और इन्द्र के बीच संधि कैसे होगी? दो महापुरुषों के बीच मैत्री कैसे स्थापित होगी?’॥20–22॥   |   mahabharat अध्याय 5.10: इन्द्रसहित देवताओंका भगवान‍् विष्णुकी शरणमें जाना और इन्द्रका उनके आज्ञानुसार वृत्रासुरसे संधि करके अवसर पाकर उसे मारना एवं ब्रह्महत्याके भयसे जलमें छिपना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 10: इन्द्रसहित देवताओंका भगवान‍् विष्णुकी शरणमें जाना और इन्द्रका उनके आज्ञानुसार वृत्रासुरसे संधि करके अवसर पाकर उसे मारना एवं ब्रह्महत्याके भयसे जलमें छिपना  »  श्लोक 20-22
 
 
श्लोक  5.10.20-22 
अवाप्स्यसि सुखं त्वं च शक्रलोकांश्च शाश्वतान्।
ऋषिवाक्यं निशम्याथ वृत्र: स तु महाबल:॥ २०॥
उवाच तानृषीन् सर्वान् प्रणम्य शिरसासुर:।
सर्वे यूयं महाभागा गन्धर्वाश्चैव सर्वश:॥ २१॥
यद् ब्रूथ तच्छ्रुतं सर्वं ममापि शृणुतानघा:।
संधि: कथं वै भविता मम शक्रस्य चोभयो:।
तेजसोर्हि द्वयोर्देवा: सख्यं वै भविता कथम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
इससे तुम्हें सुख मिलेगा और इन्द्र के सनातन लोकों पर भी तुम्हारा अधिकार होगा। ऋषियों के ये वचन सुनकर महाबली वृत्रासुर ने सिर झुकाकर सबको प्रणाम किया और इस प्रकार कहा—‘हे श्रेष्ठ देवताओं! हे श्रेष्ठ ऋषियों और गन्धर्वों! आप सब जो कुछ कह रहे हैं, वह मैंने सुन लिया है। हे निष्पाप देवताओं! अब आप सब मेरी भी बात सुनिए। मेरे और इन्द्र के बीच संधि कैसे होगी? दो महापुरुषों के बीच मैत्री कैसे स्थापित होगी?’॥20–22॥
 
‘This will bring you happiness and you will also have authority over the eternal worlds of Indra.’ Hearing these words of the sages, the mighty Vritrasura bowed his head and saluted them all and said thus—‘O great gods! O great sages and Gandharvas! I have heard everything that you all are saying. O sinless gods! Now you all listen to me too. How will a treaty be struck between me and Indra? How will a friendly relationship be established between two illustrious men?’॥20–22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)