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mahabharat 5.1.9: भगवान श्रीकृष्ण ने पाण्डवों के हितार्थ उन श्रेष्ठ राजाओं को संगठित किया था। जब वे सब लोग बोलना बन्द कर दिए गए, तब सिंह के समान पराक्रमी वे सब राजा मिलकर श्रीकृष्ण के अर्थपूर्ण और फलदायी वचन सुनने लगे॥9॥   |   mahabharat अध्याय 5.1: राजा विराटकी सभामें भगवान‍् श्रीकृष्णका भाषण   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 1: राजा विराटकी सभामें भगवान‍् श्रीकृष्णका भाषण  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.1.9 
कथान्तमासाद्य च माधवेन
संघट्टिता: पाण्डवकार्यहेतो:।
ते राजसिंहा: सहिता ह्यशृण्वन्
वाक्यं महार्थं सुमहोदयं च॥ ९॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्रीकृष्ण ने पाण्डवों के हितार्थ उन श्रेष्ठ राजाओं को संगठित किया था। जब वे सब लोग बोलना बन्द कर दिए गए, तब सिंह के समान पराक्रमी वे सब राजा मिलकर श्रीकृष्ण के अर्थपूर्ण और फलदायी वचन सुनने लगे॥9॥
 
Lord Krishna had organized those great kings for the Pandavas' cause. When all those people stopped talking, then all those kings as powerful as lions started listening to Krishna's meaningful and fruitful words together.॥9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)