श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 1: राजा विराटकी सभामें भगवान‍् श्रीकृष्णका भाषण  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.1.15 
धर्मार्थयुक्तं तु महीपतित्वं
ग्रामेऽपि कस्मिंश्चिदयं बुभूषेत्।
पित्र्यं हि राज्यं विदितं नृपाणां
यथापकृष्टं धृतराष्ट्रपुत्रै:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
यदि धर्म और अर्थ के अनुसार किसी छोटे से गाँव का भी राज्य मिल जाए, तो भी वे उसे लेने की इच्छा कर सकते हैं। आप सभी राजा जानते हैं कि धृतराष्ट्र के पुत्रों ने पाण्डवों के पैतृक राज्य को किस प्रकार हड़प लिया था॥ 15॥
 
Even if a kingdom of a small village is obtained in accordance with Dharma and Artha, then they may desire to take it. All of you kings know how the sons of Dhritarashtra usurped the ancestral kingdom of the Pandavas.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)