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mahabharat 5.1.13-14: अपनी कुल-परम्परा से प्राप्त राज्य की लालसा के कारण ही इन वीरों ने अज्ञातवास में दूसरों की सेवा करते हुए अपना तेरहवाँ वर्ष पूरा किया है। ऐसी स्थिति में तुम सब लोग उस साधन का विचार करो जिससे धर्मपुत्र युधिष्ठिर और राजा दुर्योधन का कल्याण हो। तुम लोग ऐसा मार्ग खोजो जो धर्म के अनुकूल हो, न्यायपूर्ण हो और इन श्रेष्ठ कुरु योद्धाओं का यश बढ़ाने वाला हो। धर्मराज युधिष्ठिर देवताओं का भी राज्य स्वीकार नहीं करना चाहेंगे, यदि वह धर्म के विरुद्ध हो॥13-14॥   |   mahabharat अध्याय 5.1: राजा विराटकी सभामें भगवान‍् श्रीकृष्णका भाषण   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 1: राजा विराटकी सभामें भगवान‍् श्रीकृष्णका भाषण  »  श्लोक 13-14
 
 
श्लोक  5.1.13-14 
एतै: परप्रेष्यनियोगयुक्तै-
रिच्छद्भिराप्तं स्वकुलेन राज्यम्।
एवंगते धर्मसुतस्य राज्ञो
दुर्योधनस्यापि च यद्धितं स्यात्॥ १३॥
तच्चिन्तयध्वं कुरुपुङ्गवानां
धर्म्यं च युक्तं च यशस्करं च।
अधर्मयुक्तं न च कामयेत
राज्यं सुराणामपि धर्मराज:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
अपनी कुल-परम्परा से प्राप्त राज्य की लालसा के कारण ही इन वीरों ने अज्ञातवास में दूसरों की सेवा करते हुए अपना तेरहवाँ वर्ष पूरा किया है। ऐसी स्थिति में तुम सब लोग उस साधन का विचार करो जिससे धर्मपुत्र युधिष्ठिर और राजा दुर्योधन का कल्याण हो। तुम लोग ऐसा मार्ग खोजो जो धर्म के अनुकूल हो, न्यायपूर्ण हो और इन श्रेष्ठ कुरु योद्धाओं का यश बढ़ाने वाला हो। धर्मराज युधिष्ठिर देवताओं का भी राज्य स्वीकार नहीं करना चाहेंगे, यदि वह धर्म के विरुद्ध हो॥13-14॥
 
It is only because of the desire for the kingdom inherited from their family tradition that these brave men have completed their thirteenth year in an unknown state, serving others. In such a situation, you all should think about the means that will benefit Dharmaputra Yudhishthira and King Duryodhana. You should find a way that is in accordance with Dharma, just and will increase the fame of these best Kuru warriors. Dharmaraja Yudhishthira will not want to accept the kingdom of even the gods if it is against Dharma.॥13-14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)