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mahabharat 5.1.10: श्रीकृष्ण ने अपना भाषण शुरू किया - उपस्थित मित्रों! आप सभी जानते हैं कि सुबल पुत्र शकुनि ने किस प्रकार धर्मात्मा युधिष्ठिर को द्यूत क्रीड़ा में छल से हराकर उनका राज्य छीन लिया था। उस द्यूतक्रीड़ा में शर्त यह थी कि जो हारेगा उसे बारह वर्ष वन में रहकर एक वर्ष अज्ञातवास करना होगा।   |   mahabharat अध्याय 5.1: राजा विराटकी सभामें भगवान‍् श्रीकृष्णका भाषण   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 1: राजा विराटकी सभामें भगवान‍् श्रीकृष्णका भाषण  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.1.10 
श्रीकृष्ण उवाच
सर्वैर्भवद्भिर्विदितं यथायं
युधिष्ठिर: सौबलेनाक्षवत्याम्।
जितो निकृत्यापहृतं च राज्यं
वनप्रवासे समय: कृतश्च॥ १०॥
 
 
अनुवाद
श्रीकृष्ण ने अपना भाषण शुरू किया - उपस्थित मित्रों! आप सभी जानते हैं कि सुबल पुत्र शकुनि ने किस प्रकार धर्मात्मा युधिष्ठिर को द्यूत क्रीड़ा में छल से हराकर उनका राज्य छीन लिया था। उस द्यूतक्रीड़ा में शर्त यह थी कि जो हारेगा उसे बारह वर्ष वन में रहकर एक वर्ष अज्ञातवास करना होगा।
 
Shri Krishna started his speech - Friends present! All of you know that how Subal's son Shakuni defeated the righteous Yudhishthira by deceit in the gambling hall and snatched his kingdom. In that gambling, the condition was that the one who loses will have to live in the forest for twelve years and live incognito for one year.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)