vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 4: विराट पर्व
»
अध्याय 9: द्रौपदीका सैरन्ध्रीके वेशमें विराटके रनिवासमें जाकर रानी सुदेष्णासे वार्तालाप करना और वहाँ निवास पाना
»
श्लोक 27
श्लोक
4.9.27
यश्च त्वां सततं पश्येत् पुरुषश्चारुहासिनि।
एवं सर्वानवद्याङ्गि स चानङ्गवशो भवेत्॥ २७॥
अनुवाद
हे चारुहासिनी! इसी प्रकार जो मनुष्य प्रतिदिन तुम्हारा दर्शन करेगा, वह भी कामदेव के प्रभाव में आ जाएगा॥27॥
Good luck! Charuhasini! Similarly, the man who sees you every day will also fall under the influence of Kamadeva. 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×