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श्री महाभारत
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पर्व 4: विराट पर्व
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अध्याय 9: द्रौपदीका सैरन्ध्रीके वेशमें विराटके रनिवासमें जाकर रानी सुदेष्णासे वार्तालाप करना और वहाँ निवास पाना
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श्लोक 26
श्लोक
4.9.26
यं हि त्वमनवद्याङ्गि तरलायतलोचने।
प्रसक्तमभिवीक्षेथा: स कामवशगो भवेत्॥ २६॥
अनुवाद
हे निर्दोष शरीर वाले, चंचल एवं विशाल नेत्रों वाले सैरन्ध्री! जिस किसी पुरुष को तुम ध्यानपूर्वक देखोगी, वह काम का वश में हो जाएगा॥ 26॥
O Sairandhri, with flawless body parts and restless and large eyes! Whichever man you look at intently, he will fall prey to Kama.॥ 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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