श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 9: द्रौपदीका सैरन्ध्रीके वेशमें विराटके रनिवासमें जाकर रानी सुदेष्णासे वार्तालाप करना और वहाँ निवास पाना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  4.9.22 
सुदेष्णोवाच
मूर्ध्नि त्वां वासयेयं वै संशयो मे न विद्यते।
न चेदिच्छति राजा त्वां गच्छेत् सर्वेण चेतसा॥ २२॥
 
 
अनुवाद
सुदेष्णा बोली, "सुन्दरी! यदि मेरे मन में कोई संशय न होता, तो मैं तुम्हें हृदय से स्वीकार कर लेती। यदि राजा तुम्हें चाहने न लगे - यदि वह तुम्हारे प्रति पूर्णतया आसक्त न हो जाए, तो मुझे तुम्हें रखने में कोई आपत्ति न होगी।"
 
Sudeshna said - Beautiful girl! If there was no doubt in my mind, I would have accepted you with all my heart. If the king does not start liking you - if he does not get completely attached to you, then I will have no problem in keeping you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)