श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 72: अर्जुनका अपनी पुत्रवधूके रूपमें उत्तराको ग्रहण करना एवं अभिमन्यु और उत्तराका विवाह  »  श्लोक 20-22
 
 
श्लोक  4.72.20-22 
प्रीतोऽभवद् दुहितरं दत्त्वा तामभिमन्यवे।
तत: प्रत्युपयातेषु पार्थिवेषु ततस्तत:॥ २०॥
तत्रागमद् वासुदेवो वनमाली हलायुध:।
कृतवर्मा च हार्दिक्यो युयुधानश्च सात्यकि:॥ २१॥
अनाधृष्टिस्तथाक्रूर: साम्बो निशठ एव च।
अभिमन्युमुपादाय सह मात्रा परंतपा:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
राजा विराट अपनी कन्या को अभिमन्यु को देकर बहुत प्रसन्न हुए। तत्पश्चात् सब राजा विश्राम के लिए अपने-अपने स्थान पर आये। वहाँ पुष्पमाला धारण किये हुए भगवान श्रीकृष्ण, वसुदेवनन्दन, हलरूपी अस्त्र धारण किये हुए बलरामजी, हृदिकापुत्र कृतवर्मा, युयुधान नाम से प्रसिद्ध सात्यकि, अनादृष्टि, अक्रूर, साम्ब और निषथ - ये सभी वीर अभिमन्यु और उसकी माता सुभद्रा के साथ वहाँ आये थे। 20-22॥
 
King Virat was very happy to offer his daughter to Abhimanyu. After that, all the kings came to their respective places for rest. There, Lord Shri Krishna, having garland of flowers, Vasudevanandan, Balram, carrying the weapon in the form of a plow, Kritavarma, the son of Hridika, Satyaki, famous by the name of Yuyudhan, Anadhrishti, Akrura, Samb and Nishath - all of them had come there along with the brave Abhimanyu and his mother Subhadra. 20-22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)