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mahabharat 4.71.34: हे सव्यसाची धनंजय, कृपया मेरी पुत्री उत्तरा को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करें। यह महापुरुष उसके लिए अत्यंत उपयुक्त पति है। 34॥   |   mahabharat अध्याय 4.71: विराटको अन्य पाण्डवोंका भी परिचय प्राप्त होना तथा विराटके द्वारा युधिष्ठिरको राज्य समर्पण करके अर्जुनके साथ उत्तराके विवाहका प्रस्ताव करना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 71: विराटको अन्य पाण्डवोंका भी परिचय प्राप्त होना तथा विराटके द्वारा युधिष्ठिरको राज्य समर्पण करके अर्जुनके साथ उत्तराके विवाहका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  4.71.34 
उत्तरां प्रतिगृह्णातु सव्यसाची धनंजय:।
अयं ह्यौपयिको भर्ता तस्या: पुरुषसत्तम:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
हे सव्यसाची धनंजय, कृपया मेरी पुत्री उत्तरा को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करें। यह महापुरुष उसके लिए अत्यंत उपयुक्त पति है। 34॥
 
Savyasachi Dhananjay, please accept my daughter Uttara as your wife. This great man is a very suitable husband for her. 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)