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mahabharat 4.71.32: 'यह बड़े सौभाग्य की बात है कि आप सभी सकुशल वन से लौट आए हैं। यह भी बड़े हर्ष की बात है कि आपने दुष्ट कौरवों से छिपकर वनवास का कठिन काल पूरा किया है।   |   mahabharat अध्याय 4.71: विराटको अन्य पाण्डवोंका भी परिचय प्राप्त होना तथा विराटके द्वारा युधिष्ठिरको राज्य समर्पण करके अर्जुनके साथ उत्तराके विवाहका प्रस्ताव करना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 71: विराटको अन्य पाण्डवोंका भी परिचय प्राप्त होना तथा विराटके द्वारा युधिष्ठिरको राज्य समर्पण करके अर्जुनके साथ उत्तराके विवाहका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  4.71.32 
दिष्टॺा भवन्त: सम्प्राप्ता: सर्वे कुशलिनो वनात्।
दिष्टॺा सम्पालितं कृच्छ्रमज्ञातं वै दुरात्मभि:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
'यह बड़े सौभाग्य की बात है कि आप सभी सकुशल वन से लौट आए हैं। यह भी बड़े हर्ष की बात है कि आपने दुष्ट कौरवों से छिपकर वनवास का कठिन काल पूरा किया है।
 
‘It is a matter of great fortune that all of you have returned safely from the forest. It is also a matter of great joy that you have completed the difficult period of exile by remaining hidden from the evil-minded Kauravas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)