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mahabharat 4.71.31: पाण्डवों को देखकर सेनाओं के स्वामी राजा विराट को संतोष नहीं हुआ। वे राजा युधिष्ठिर से प्रेमपूर्वक इस प्रकार बोले -॥31॥   |   mahabharat अध्याय 4.71: विराटको अन्य पाण्डवोंका भी परिचय प्राप्त होना तथा विराटके द्वारा युधिष्ठिरको राज्य समर्पण करके अर्जुनके साथ उत्तराके विवाहका प्रस्ताव करना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 71: विराटको अन्य पाण्डवोंका भी परिचय प्राप्त होना तथा विराटके द्वारा युधिष्ठिरको राज्य समर्पण करके अर्जुनके साथ उत्तराके विवाहका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  4.71.31 
नातृप्यद् दर्शने तेषां विराटो वाहिनीपति:।
स प्रीयमाणो राजानं युधिष्ठिरमथाब्रवीत्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
पाण्डवों को देखकर सेनाओं के स्वामी राजा विराट को संतोष नहीं हुआ। वे राजा युधिष्ठिर से प्रेमपूर्वक इस प्रकार बोले -॥31॥
 
King Virata, the lord of the armies, was not satisfied with seeing the Pandavas. He spoke lovingly to King Yudhishthira in this manner -॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)