श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 71: विराटको अन्य पाण्डवोंका भी परिचय प्राप्त होना तथा विराटके द्वारा युधिष्ठिरको राज्य समर्पण करके अर्जुनके साथ उत्तराके विवाहका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  4.71.26 
एतेषां बाहुवीर्येण अस्माकं विजयो मृधे।
एवं सर्वे सहामात्या: कुन्तीपुत्रं युधिष्ठिरम्।
प्रसादयामो भद्रं ते सानुजं पाण्डवर्षभम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
इन पाण्डवों के बाहुबल से ही हम युद्ध में विजयी हुए हैं; इसलिए वत्स! तुम्हारा कल्याण हो। हम सब अपने मन्त्रियों के साथ जाकर कुन्ती के श्रेष्ठ पुत्र युधिष्ठिर को उनके छोटे भाइयों सहित प्रसन्न करें। 26॥
 
It is because of the muscle power of these Pandavas that we have won the battle; That's why Vatsa! do you good. Let us all go with our ministers and please Yudhishthira, the best son of Kunti, along with his younger brothers. 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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