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श्लोक 4.71.25  |
विराट उवाच
अहं खल्वपि संग्रामे शत्रूणां वशमागत:।
मोक्षितो भीमसेनेन गावश्चापि जितास्तथा॥ २५॥ |
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| अनुवाद |
| विराट बोले - बेटा! त्रिगर्तों के साथ युद्ध में मैं भी शत्रुओं के अधीन हो गया था, किन्तु भीमसेन ने मुझे बचाया और हमारी सारी गायें भी वापस ले लीं। |
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| Virata said - Son! I too was subdued by the enemies in the war with the Trigartas, but Bhimasena rescued me and also won back all our cows. |
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