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श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 71: विराटको अन्य पाण्डवोंका भी परिचय प्राप्त होना तथा विराटके द्वारा युधिष्ठिरको राज्य समर्पण करके अर्जुनके साथ उत्तराके विवाहका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  4.71.20 
अनेन विद्धो मातङ्गो महानेकेषुणा हत:।
सुवर्णकक्ष: संग्रामे दन्ताभ्यामगमन्महीम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
युद्ध में उसके एक ही बाण से घायल होकर विकर्ण का विशाल हाथी, जो स्वर्ण-श्रृंखला से सुशोभित था, दोनों दाँतों सहित भूमि पर गिर पड़ा और मर गया।
 
In the battle, wounded by a single arrow of his, Vikarna's huge elephant, adorned with a golden chain, fell down with both its tusks resting on the ground and died.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)