श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 71: विराटको अन्य पाण्डवोंका भी परिचय प्राप्त होना तथा विराटके द्वारा युधिष्ठिरको राज्य समर्पण करके अर्जुनके साथ उत्तराके विवाहका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  4.71.18 
वैशम्पायन उवाच
एवं निवेद्य तान् पार्थान् पाण्डवान् पञ्च भूपते:।
ततोऽर्जुनस्य वैराटि: कथयामास विक्रमम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं- राजन! इस प्रकार पाण्डवराज को कुन्ती के उन पाँचों पुत्रों का परिचय देकर विराट कुमार अर्जुन के पराक्रम के विषय में बताने लगे।
 
Vaishampayanji says- Rajan! In this way, after introducing those five sons of Kunti to the king of Pandavas, Virat Kumar started telling about the bravery of Arjuna.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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