श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 71: विराटको अन्य पाण्डवोंका भी परिचय प्राप्त होना तथा विराटके द्वारा युधिष्ठिरको राज्य समर्पण करके अर्जुनके साथ उत्तराके विवाहका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  4.71.13 
उत्तर उवाच
य एष जाम्बूनदशुद्धगौर-
तनुर्महान् सिंह इव प्रवृद्ध:।
प्रचण्डघोण: पृथुदीर्घनेत्र-
स्ताम्रायताक्ष: कुरुराज एष:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
उत्तर: - पिताजी! जिनका शरीर शुद्ध जम्बूनाद स्वर्ण के समान सुन्दर है, जो सबमें ज्येष्ठ हैं और सिंह के समान बलवान हैं, जिनकी नाक लम्बी है और जिनकी आँखें बड़ी-बड़ी तथा लालिमायुक्त हैं और कानों तक फैली हुई हैं, वे कुरुवंश के राजा महाराज युधिष्ठिर हैं॥13॥
 
Answer: - Father! The one whose body is fair like pure Jambuṇād gold, who is the eldest of all and is as strong as a lion, whose nose is long and whose eyes are large and have some redness and spread till the ears, is the King of the Kuru clan, Maharaja Yudhishthir.॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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