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mahabharat 4.71.10: महाराज! हमने आपके महल में अपना वनवास बड़े सुख से बिताया है। जैसे एक बच्चा गर्भ में अपना जीवन बिताता है, वैसे ही हमने भी अपना वनवास यहीं बिताया है॥10॥   |   mahabharat अध्याय 4.71: विराटको अन्य पाण्डवोंका भी परिचय प्राप्त होना तथा विराटके द्वारा युधिष्ठिरको राज्य समर्पण करके अर्जुनके साथ उत्तराके विवाहका प्रस्ताव करना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 71: विराटको अन्य पाण्डवोंका भी परिचय प्राप्त होना तथा विराटके द्वारा युधिष्ठिरको राज्य समर्पण करके अर्जुनके साथ उत्तराके विवाहका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  4.71.10 
उषिता: स्मो महाराज सुखं तव निवेशने।
अज्ञातवासमुषिता गर्भवास इव प्रजा:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
महाराज! हमने आपके महल में अपना वनवास बड़े सुख से बिताया है। जैसे एक बच्चा गर्भ में अपना जीवन बिताता है, वैसे ही हमने भी अपना वनवास यहीं बिताया है॥10॥
 
King! We have spent our exile in your palace very happily. Just like a child spends his life in the womb, we have also spent our exile here.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)