श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 71: विराटको अन्य पाण्डवोंका भी परिचय प्राप्त होना तथा विराटके द्वारा युधिष्ठिरको राज्य समर्पण करके अर्जुनके साथ उत्तराके विवाहका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  4.71.1-2 
विराट उवाच
यद्येष राजा कौरव्य: कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिर:।
कतमोऽस्यार्जुनो भ्राता भीमश्च कतमो बली॥ १॥
नकुल: सहदेवो वा द्रौपदी वा यशस्विनी।
यदा द्यूतजिता: पार्था न प्राज्ञायन्त ते क्वचित्॥ २॥
 
 
अनुवाद
विराट ने पूछा, "यदि ये कुरुवंश के रत्न, कुन्तीपुत्र राजा युधिष्ठिर हैं, तो फिर इनमें से उनका भाई अर्जुन कौन है? पराक्रमी भीम कौन है? नकुल, सहदेव और प्रतापी द्रौपदी कौन हैं? जब से कुन्तीपुत्र जुए में हारे हैं, तब से उनका कहीं पता नहीं चला है।" 1-2
 
Virata asked, "If this is the jewel of the Kuru clan, Kunti's son, King Yudhishthira, then who among them is his brother Arjun? Who is the mighty Bhima? Who are Nakula, Sahadeva and the glorious Draupadi? Ever since Kunti's sons were defeated in gambling, they have not been traced anywhere." 1-2
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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