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mahabharat 4.70.9: अर्जुन ने कहा- राजन! आपके राजा के सिंहासन की तो बात ही छोड़ दीजिए, इन्हें तो इन्द्र के आधे सिंहासन पर भी बैठने का अधिकार है। ये ब्राह्मणों के भक्त, शास्त्रों के विद्वान, त्यागी, यज्ञ करने में तत्पर और अपने व्रतों का दृढ़तापूर्वक पालन करने वाले हैं।॥9॥   |   mahabharat अध्याय 4.70: अर्जुनका राजा विराटको महाराज युधिष्ठिरका परिचय देना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 70: अर्जुनका राजा विराटको महाराज युधिष्ठिरका परिचय देना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  4.70.9 
अर्जुन उवाच
इन्द्रस्यार्धासनं राजन्नयमारोढुमर्हति।
ब्रह्मण्य: श्रुतवांस्त्यागी यज्ञशीलो दृढव्रत:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन ने कहा- राजन! आपके राजा के सिंहासन की तो बात ही छोड़ दीजिए, इन्हें तो इन्द्र के आधे सिंहासन पर भी बैठने का अधिकार है। ये ब्राह्मणों के भक्त, शास्त्रों के विद्वान, त्यागी, यज्ञ करने में तत्पर और अपने व्रतों का दृढ़तापूर्वक पालन करने वाले हैं।॥9॥
 
Arjun said- Rajan! Forget about your king's throne, he has the right to sit on half the throne of Indra too. These are devotees of Brahmins, scholars of scriptures, renunciant, willing to perform sacrifices and observe their fasts with determination. 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)