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श्री महाभारत
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पर्व 4: विराट पर्व
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अध्याय 70: अर्जुनका राजा विराटको महाराज युधिष्ठिरका परिचय देना
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श्लोक 17
श्लोक
4.70.17
संसरन्ति दिश: सर्वा यशसोऽस्य इवांशव:।
उदितस्येव सूर्यस्य तेजसोऽनु गभस्तय:॥ १७॥
अनुवाद
जैसे सूर्योदय के पश्चात सूर्य की किरणें सब दिशाओं में फैल जाती हैं, वैसे ही उनके यश के साथ उनकी श्वेत किरणें भी सब दिशाओं में फैल रही हैं॥17॥
Just as after sunrise the rays of the sun spread in all directions, similarly along with his fame its white rays are spreading in all directions.॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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