श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 70: अर्जुनका राजा विराटको महाराज युधिष्ठिरका परिचय देना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  4.70.16 
अयं कुरूणामृषभो धर्मराजो युधिष्ठिर:।
अस्य कीर्ति: स्थिता लोके सूर्यस्येवोद्यत: प्रभा॥ १६॥
 
 
अनुवाद
वे कुरुवंश के श्रेष्ठ योद्धा युधिष्ठिर हैं। उनकी सुखदायक कीर्ति सूर्योदय की शान्त प्रभा के समान सम्पूर्ण जगत में फैली हुई है॥16॥
 
He is the best warrior of the Kuru dynasty, Yudhishthira. His happiness-giving fame is spread all over the world like the peaceful radiance of the sunrise.॥16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)