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mahabharat 4.70.13: वे दूरदर्शी, अत्यन्त तेजस्वी और नगर तथा देश के लोगों के अत्यंत प्रिय हैं। वे पाण्डवों में सबसे अधिक वीर हैं और सदैव यज्ञ तथा धार्मिक अनुष्ठानों में लगे रहते हैं तथा मन और इन्द्रियों को वश में रखते हैं। 13॥   |   mahabharat अध्याय 4.70: अर्जुनका राजा विराटको महाराज युधिष्ठिरका परिचय देना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 70: अर्जुनका राजा विराटको महाराज युधिष्ठिरका परिचय देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  4.70.13 
दीर्घदर्शी महातेजा: पौरजानपदप्रिय:।
पाण्डवानामतिरथो यज्ञधर्मपरो वशी॥ १३॥
 
 
अनुवाद
वे दूरदर्शी, अत्यन्त तेजस्वी और नगर तथा देश के लोगों के अत्यंत प्रिय हैं। वे पाण्डवों में सबसे अधिक वीर हैं और सदैव यज्ञ तथा धार्मिक अनुष्ठानों में लगे रहते हैं तथा मन और इन्द्रियों को वश में रखते हैं। 13॥
 
He is far-sighted, very brilliant and very dear to the people of the city and the country. He is the most brave among the Pandavas and is always engaged in Yagya and religious rituals and keeps the mind and senses under control. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)