श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 7: युधिष्ठिरका राजसभामें जाकर विराटसे मिलना और वहाँ आदरपूर्वक निवास पाना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  4.7.15 
विराट उवाच
हन्यामवश्यं यदि तेऽप्रियं चरेत्
प्रव्राजयेयं विषयाद् द्विजांस्तथा।
शृण्वन्तु मे जानपदा: समागता:
कङ्को यथाहं विषये प्रभुस्तथा॥ १५॥
 
 
अनुवाद
विराट बोले - हे ब्रह्मन्! यदि ब्राह्मण के अतिरिक्त कोई अन्य व्यक्ति आपको अप्रसन्न करेगा, तो मैं उसे अवश्य ही मृत्युदंड दूँगा। यदि ब्राह्मण आपको अप्रसन्न करेंगे, तो मैं उन्हें देश से निकाल दूँगा। [युधिष्ठिर से ऐसा कहकर राजा विराट ने सभा के अन्य सदस्यों से कहा -] मेरे राज्य में रहने वाले लोगों और इस सभा में आए हुए लोगों! मेरी बात सुनो, जैसे मैं इस मत्स्य देश का स्वामी हूँ, वैसे ही ये कंक भी हैं॥ 15॥
 
Virat said - O Brahman! If any person other than a Brahmin displeases you, I will definitely punish him with death. If Brahmins offend you, I will expel them from the country. [After saying this to Yudhishthira, King Virat said to other members of the assembly -] People living in my kingdom and those who have come to this assembly! Listen to me, just as I am the lord of this Matsya country, so are these Kankas.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)