पदं पदसहस्रेण यश्चरन् नापराध्नुयात्।
तेन कर्णेन ते तात कथमासीत् समागम:॥ ६९॥
मनुष्यलोके सकले यस्य तुल्यो न विद्यते।
तेन भीष्मेण ते तात कथमासीत् समागम:॥ ७०॥
अनुवाद
पिताश्री! जो एक ही लक्ष्य के साथ हजारों बाणों को मार गिराता है और कभी चूकता नहीं, उस कर्ण के साथ आपने किस प्रकार युद्ध किया? पुत्र! सम्पूर्ण मानव-जगत् में जिसकी कोई बराबरी नहीं है, उस भीष्म के साथ आपने किस प्रकार युद्ध किया?॥69-70॥
Father! How did you fight with Karna, who shoots arrows to hit thousands of targets along with a single target and never misses? Son! How did you fight with Bhishma, who has no equal in the entire human world?॥ 69-70॥