श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 68: राजा विराटकी उत्तरके विषयमें चिन्ता, विजयी उत्तरका नगरमें प्रवेश, प्रजाओंद्वारा उनका स्वागत, विराटद्वारा युधिष्ठिरका तिरस्कार और क्षमा-प्रार्थना एवं उत्तरसे युद्धका समाचार पूछना  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  4.68.66 
वैशम्पायन उवाच
शोणिते तु व्यतिक्रान्ते प्रविवेश बृहन्नला।
अभिवाद्य विराटं तु कङ्कं चाप्युपतिष्ठत॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं - हे राजन! जब युधिष्ठिर की नाक से रक्त बहना बंद हो गया, तब बृहन्नला ने राजसभा में प्रवेश किया। उसने विराट का अभिवादन किया और कंक को भी प्रणाम किया।
 
Vaishampayana says - O King! When the bleeding from Yudhishthira's nose stopped, Brihannala entered the royal court. He greeted Virata and also bowed to Kanka. 66.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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