न दूषयामि ते राजन् यद् वै हन्याददूषकम्।
बलवन्तं प्रभुं राजन् क्षिप्रं दारुणमाप्नुयात्॥ ६५॥
अनुवाद
हे राजन! जो किसी की निन्दा या अपराध न करे, उसे मारना अन्याय है। फिर भी मैं आपके कृत्य की निन्दा नहीं करता, क्योंकि शक्तिशाली राजा को प्रायः ऐसे कठोर कृत्य करने का अवसर मिल ही जाता है।'
O King! It is unjust to kill someone who does not criticize or commit a crime against anyone. However, I do not condemn your action because a powerful king often gets an opportunity to commit such harsh acts.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥