श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 68: राजा विराटकी उत्तरके विषयमें चिन्ता, विजयी उत्तरका नगरमें प्रवेश, प्रजाओंद्वारा उनका स्वागत, विराटद्वारा युधिष्ठिरका तिरस्कार और क्षमा-प्रार्थना एवं उत्तरसे युद्धका समाचार पूछना  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  4.68.60 
विराट उवाच
मयायं ताडितो जिह्मो न चाप्येतावदर्हति।
प्रशस्यमाने यच्छूरे त्वयि षण्ढं प्रशंसति॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
विराट बोले - बेटा! मैंने इस दुष्ट को मार डाला है। यह इतने सम्मान के योग्य नहीं है। देखो, जब मैं तुम्हारी वीरता की प्रशंसा करता हूँ, तो यह उस नपुंसक की प्रशंसा करने लगता है।
 
Virat said - Son! I have killed this wicked man. He is not worthy of so much respect. See, when I praise your bravery, he starts praising that eunuch. 60.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd