श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 68: राजा विराटकी उत्तरके विषयमें चिन्ता, विजयी उत्तरका नगरमें प्रवेश, प्रजाओंद्वारा उनका स्वागत, विराटद्वारा युधिष्ठिरका तिरस्कार और क्षमा-प्रार्थना एवं उत्तरसे युद्धका समाचार पूछना  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  4.68.59 
तत: पप्रच्छ पितरं त्वरमाण इवोत्तर:।
केनायं ताडितो राजन् केन पापमिदं कृतम्॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
तब उत्तरा ने बड़ी चिन्ता से अपने पिता से पूछा, "हे राजन! इसे किसने मारा है? यह पाप किसने किया है?"
 
Then Uttara very anxiously asked his father, "O King! Who has killed him? Who has committed this sin?"
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd