vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 4: विराट पर्व
»
अध्याय 68: राजा विराटकी उत्तरके विषयमें चिन्ता, विजयी उत्तरका नगरमें प्रवेश, प्रजाओंद्वारा उनका स्वागत, विराटद्वारा युधिष्ठिरका तिरस्कार और क्षमा-प्रार्थना एवं उत्तरसे युद्धका समाचार पूछना
»
श्लोक 52
श्लोक
4.68.52
ततो द्वा:स्थ: प्रविश्यैव विराटमिदमब्रवीत्।
बृहन्नलासहायश्च पुत्रो द्वार्युत्तर: स्थित:॥ ५२॥
अनुवाद
तब द्वारपाल ने अन्दर जाकर राजा विराट से कहा, 'भगवन्! राजकुमार बृहन्नला सहित उत्तरी द्वार पर खड़े हैं।' 52.
Then the gatekeeper went in and said to King Virata, 'Lord! The prince along with Brihannala are standing at the northern gate.' 52.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd